
चतरा मे 87 साल की उम्र में भी झारखंड के सपूत लक्ष्मी कांत शुक्ला ने अन्याय के खिलाफ जो जंग छेड़ी थी, वो रंग लाई। 1 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे इस बुजुर्ग ने लूटपाट, हत्या, रैकेटियरिंग और भू-माफिया के काले कारनामों को बेनकाब किया। सरकारी अनाज गोदाम से करोड़ों का चावल गायब, शहर के तालाब की दो एकड़ जमीन पर माफिया का कब्जा, और सदियों पुराने श्मशान घाट पर धोखा—इन मुद्दों पर चतरा DC रवि आनंद के हस्तक्षेप से बड़ा ब्रेकथ्रू हुआ। SDM जहूर आलम की अगुवाई में चतरा सदर BDO हरिनाथ महतो और CO अनिल कुमार के साथ लंबी वार्ता के बाद शुक्ला ने हड़ताल को एक महीने के लिए टाल दिया। SDM ने कंधा थपथपाते हुए कहा, “आपकी हर मांग पर गंभीरता से विचार होगा। असर एक महीने में दिखने लगेगा।” उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए: कोर्ट के फाइनल फैसले के 15 दिनों में पार्टियों को नकल की कॉपी जरूर दें, फैसले से पहले कोई एप्लीकेशन न लें, और हर महीने के वर्किंग डे पर केस स्टेटस नोटिस बोर्ड पर चपकाया करें। सबसे बड़ी राहत—श्मशान घाट की जमीन पूरी तरह सुरक्षित है !
शुक्ला का आंदोलन सालों की लड़ाई का प्रतीक है। कोर्ट के फैसले के बावजूद सरकारें जमीन आजाद नहीं करा पाईं।
