
Chatra : झारखंड के चतरा जिले अंतर्गत प्रतापपुर में कभी क्षेत्र की शान और ऐतिहासिक पहचान माना जाने वाला राजगढ़ किला आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार हो चुका है। वर्षों पुराना यह किला अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। हालत यह है कि किले के आसपास लोग खुलेआम कचरा फेंक रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि बदबू के कारण उनका घरों में रहना मुश्किल हो गया है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह किला कभी प्रतापपुर क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर माना जाता था। दूर-दूर से लोग इसे देखने पहुंचते थे। बुजुर्ग बताते हैं कि किले से जुड़ी कई ऐतिहासिक कहानियां और लोककथाएं आज भी गांव में सुनाई जाती हैं। लेकिन समय के साथ संरक्षण के अभाव में इसकी दीवारें टूटने लगीं और अब यह पूरी तरह वीरान नजर आता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि किले के आसपास नियमित सफाई नहीं होती। धीरे-धीरे यह जगह कचरा फेंकने का अड्डा बन गई है। घरों का कूड़ा, प्लास्टिक और अन्य गंदगी यहां फेंकी जा रही है। बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। सड़ांध के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। कई बार स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। किले की साफ-सफाई, घेराबंदी और संरक्षण होने से यहां पर्यटकों का आना बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि ऐतिहासिक महत्व रखने वाला यह स्थल धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है। स्थानीय युवाओं ने भी किले के संरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकार और पुरातत्व विभाग को इस दिशा में पहल करनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक विरासत को जान सकें। ग्रामीणों ने किले के आसपास कचरा फेंकने पर रोक लगाने और नियमित सफाई कराने की मांग की है। इतिहास की गवाही देने वाला राजगढ़ किला आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यदि समय रहते इसके संरक्षण की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह मिट सकती है।
संवाददाता,प्रवीण सिंह
