
Chatra : नौतपा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों चर्चा तेज है।परंपरागत मान्यताओं के अनुसार नौतपा के दौरान पड़ने वाली तेज गर्मी और बारिश का सीधा संबंध आने वाले मानसून से माना जाता है।मौसम विशेषज्ञ भले ही मानसून को कई वैज्ञानिक कारकों पर निर्भर बताते हों,लेकिन ग्रामीण समाज में नौतपा का विशेष महत्व आज भी बना हुआ है।आचार्य अमित कुमार मिश्रा के अनुसार नौतपा में यदि तेज धूप और गर्मी पड़ती है तो इसे अच्छे मानसून का संकेत माना जाता है।वहीं लगातार बारिश होने से कमजोर या असंतुलित मानसून की संभावना उत्पन्न होती है।कृषि प्रधान क्षेत्रों में यह मान्यता भी है कि नौतपा की तेज गर्मी खेतों में मौजूद कई हानिकारक कीट-पतंगों,फफूंद और रोगजनकों की संख्या को कम करने में सहायक होती है, जिससे फसलों को लाभ मिलता है।हालांकि सभी कीट,जीवाणु और विषाणु केवल गर्मी से समाप्त नहीं होते।फिर भी तेज धूप,उच्च तापमान और शुष्क वातावरण कई हानिकारक जीवों के जीवन चक्र को प्रभावित कर उनकी संख्या कम कर सकते हैं। यही कारण है कि नौतपा को प्रकृति के संतुलन और कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। आगे उन्होंने कहा कि नौतपा सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर शुरू होता है।इस वर्ष 25 मई को सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर जाने के कारण उसी समय से नौतपा का प्रारंभ हो गया है जो नौ दिनों तक अर्थात 2 जून तक रहेगा।यह कुल 9 दिनों की अवधि होती है, इसलिए इसे “नौतपा” कहा जाता है। केवल धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।भारतीय परंपरा में नौतपा को प्रकृति के शोधन काल के रूप में देखा गया है। साथ ही भूमि के अत्यधिक गर्म होने से मानसूनी परिस्थितियां बनने में भी सहायता मिलती है।
ग्रामीणों और किसानों का मानना है कि नौतपा की स्थिति पर नजर रखकर वे आगामी खेती-किसानी की तैयारियों का भी अनुमान लगाते हैं।ऐसे में नौतपा न केवल मौसम बल्कि कृषि और पर्यावरण के संदर्भ में भी चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
रिपोर्टर मो0 साजिद
