
चतरा : जिले का ब्लड बैंक इन दिनों रक्तदान शिविरों के अभाव का गंभीर दंश झेल रहा है। जिले में नियमित रूप से ब्लड डोनेशन कैंप नहीं लगने के कारण जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे हालात में ब्लड बैंक अपनी पहचान, रक्त मित्र समूह और कुछ साहसी रक्तवीरों के सहयोग से किसी तरह व्यवस्था संभाल रहा है।
चतरा में लगभग 60 से 70 मरीज थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इन मरीजों को प्रत्येक माह नियमित रूप से निःशुल्क रक्त की आवश्यकता होती है। विशेष बात यह है कि इनसे न तो ब्लड लिया जा सकता है और न ही ब्लड जांच का प्रोसेसिंग चार्ज लिया जाता है। इसके अलावा कैंसर पीड़ित मरीजों, आदिम जनजाति बिरहोर परिवारों सहित अन्य जरूरतमंदों को भी निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि जरूरतमंदों को रक्त मुहैया कराना मुश्किल प्रतीत होने लगता है।
हालांकि इस संकट की घड़ी में रक्त मित्र समूह के सदस्य, सामाजिक पहचान के माध्यम से जुड़े लोग और रक्तदान के प्रति समर्पित युवा आगे आते हैं। उनके साहस, जोश और सक्रियता से कई मरीजों की जान बचाई जा रही है। रेड क्रॉस के सचिव धर्मेंद्र पाठक ने कहा कि यदि जिला प्रशासन की ओर से नियमित रूप से ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित कराने में सहयोग मिले, तो जिले में रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
उन्होंने जिला प्रशासन के साथ-साथ युवाओं से भी आगे आकर रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग रक्तदान के नाम से डरते हैं, जबकि इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। रक्तदान करने से शरीर को नुकसान नहीं, बल्कि लाभ होता है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है।
संवाददाता, प्रवीण कुमार सिंह
