टंडवा (चतरा):वर्षों से विवाद के घेरे में घिरे रहने वाले मगध कोल परियोजना के डिस्पैच अधिकारी चंदन चटराज की चर्चा को कोल्यांचल में जोर-शोर से हो रही है। इनकी खबर वायरल होने पर इनके कुछ सफेदपोश चेहरे बेनकाब होने पर हो जाते हैं मजबूर। क्या कारण है कि इनको मगध कोल्यांचल से नहीं किया जा रहा है तबादला। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पता चला कि ट्रांसपोर्टरों से कोयले की क्वांटिटी पर प्रति टन की अवैध वसूली की जाती है जो चंदन चटराज ने अपने से ऊपर अधिकारी के संरक्षण में करते हैं।एशिया के सबसे बड़ी कोल परियोजना में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को लेकर सीसीएल के दरभंगा हाउस से आम्रपाली के जीएम पीओ डिस्पेच अधिकारी सहित अन्य को कई बार तबादला किया गया। वही मगध परियोजना में ऐसा नहीं होने से मगध प्रबंधन सहित जीएम पीओ डिस्पेच अधिकारी पर कई गंभीर सवाल उठना शुरू हो गया है। इसके बावजूद फॉर्मेट की कोटा और कांटा करवाने वाले ट्रक ड्राइवरों से भी प्रत्येक गाड़ी ₹200 की कांटा बाबू के द्वारा वसूल कर चंदन चटराज को दिया जाता है। वैसे में कांटा बाबुओं के प्रति भूकंप पैदा करने वाले पहला डिस्पैच अधिकारी मगध में अपना परचम लहराया है।जिससे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जितनी मुंह उतनी बातें भी कही जा रही है।कुछ लोगों का कहना है कि तालमेल कर के मगध में फिर दुधारु गाय समझ कर वसूली करने की बात भी कही जा रही है। मगध डिस्पेच अधिकारी चंदन चटराज सालों से चिपके रहने के कारण कोयलांचल में चर्चा जोरों पर है। बताया गया आम्रपाली में रह चुके मगध के डिस्पेच अधिकारी चंदन चटराज पर गंभीर आरोप के कारण अम्रपाली से हटा दिया गया था। प्रावधान के तहत् संवेदनशील पदों में मात्र तीन साल हीं अधिकारी रह सकते है पर मगध प्रबंधन लक्ष्मण रेखा पार करते हुए कई अधिकारी सालों से कुर्सी पर चिपके हुए है।कोल व्यसायिक का कहना है कि डिस्पेच अधिकारी तीन साल से अधिक का समय गुजार दिया है फिर भी प्रबंधन मौन साधे है।व्यवसाय और समाज सेवी का आरोप है कि यही वजह है कि मगध में भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है। दुर्गा सोरेन सेना के कार्यकर्ताओं ने सालों से जमे अधिकारियों को तबादला करने की मांग सीसीएल के सीएमडी से कर रहे हैं। अगर इनकी तबादला तत्काल नहीं होती है मगध कोल्यांचल में भ्रष्टाचार की गंगा हमेशा की तरह बहती रहेगी।
संवाददाता :कुलदीप कुमार दास

