गिद्धौऱ(चतरा):प्रखंड के बारीसाखी गांव में शुक्रवार को प्राकृतिक खेती को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र के तत्वाधान में आयोजित की गई।केवीके के कृषि वैज्ञानिक वीरेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके व उसके लाभ के बारे में विस्तृत जानकारी दिया।उन्होंने बताया कि, प्राकृतिक खेती कृषि की प्राचीन पद्धति है।इसमें रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता है।बल्कि गाय के गोबर,गौमूत्र व अन्य घरेलू उपयोग की सामग्री का प्रयोग किया जाता है।बताया गया कि प्राकृतिक खेती में प्रकृति में उपलब्ध मित्र कीट एवं जैविक कीटनाशक द्वारा फसलों को जीवाणुओं से बचाया जाता है।वक्ताओं ने कहा कि इस तरीके से खेती करने में किसानो का खेती में कम लागत आता है।साथ ही फसल की गुणवत्ता पर असर नही होता।आने वाले समय मे बड़े पैमाने पर किसान प्राकृतिक खेती को अपनायेगे।कार्यक्रम में बिटीएम दीनदयाल प्रसाद,लैब टेक्निशियन नवल किशोर प्रजापति,मुखिया सुमीरा कुमारी,पंसस प्रियांशु देवी,उपमुखिया वीरेंद्र उर्फ विकास पांडेय सहित कई किसान उपस्थित थे।
संवाददाता कुदूस आलम

