
चतरा सदर प्रखंड के भोज्या गांव में आज एक ऐसी त्रासदी घटी, जिसने हर दिल को छलनी कर दिया। बड़का आहर तालाब की ठंडी, गहरी चपेट में मां परवा देवी और उनकी दो नन्ही परी गीता (8 वर्ष) व मालती (6 वर्ष) हमेशा के लिए सो गईं। खीरू यादव की पत्नी परवा देवी बेटियों संग कपड़े धोने तालाब किनारे पहुंची थीं। अचानक मासूम मालती का पैर फिसला और वह गहरे पानी में लहरों संग खेलने लगी।मां का मातृत्व जागा—बिना एक पल गंवाए परवा ने छलांग लगा दी, ‘बेटी को बचा लूं!’ लेकिन घबराई दूसरी बेटी गीता भी पानी की ओर लपकी। तालाब की क्रूर गहराई और फिसलन ने तीनों को निगल लिया। आसपास के ग्रामीण दौड़े, चीखें गूंजीं, मशक्कत हुई लेकिन जब शव बाहर निकले, तो सांसें थम चुकी थीं।गांव में सन्नाटा पसरा है। परिजन रो-रोकर बेहाल, हर आंख नम। एक परिवार का आंगन सूना, दोहरी मां का साया छिन गया। यह हादसा सिर्फ मौत नहीं, बल्कि लापरवाही की चेतावनी है ग्रामीण तालाबों को सुरक्षित बनाओ, वरना और मासूम खो दोगे!
