
चतरा। चतरा पुलिस ने ऑटो चालक तिलक यादव के अपहरण और उसकी रिहाई के बदले 30 लाख रुपये फिरौती मांगने के सनसनीखेज मामले का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने बिहार के गया जिले के धनगाई थाना क्षेत्र के जंगल से तिलक को सकुशल बरामद करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कैलाश दांगी (47) और मनोज कुमार (23) के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से घटना में इस्तेमाल की गई पल्सर मोटरसाइकिल संख्या जेएच-13के-8511 और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
आंखों पर पट्टी बांधकर जंगल में रखा था
पुलिस के अनुसार, तिलक यादव 13 सितंबर को अचानक लापता हो गया था। परिजनों से संपर्क कर अपहरणकर्ताओं ने उसकी रिहाई के बदले 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी। सूचना मिलने के बाद सदर थाना में कांड संख्या 390/26 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ चतरा सन्नी वर्धन के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया गया। तिलक की कोई बड़ी आर्थिक पृष्ठभूमि या पुरानी दुश्मनी सामने नहीं आने के कारण पुलिस ने इसे ब्लाइंड केस मानकर तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से जांच शुरू की। तिलक जांच के दौरान पुलिस को तिलक के गया जिले के धनगाई थाना क्षेत्र के जंगल में बंधक बनाए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद झारखंड और बिहार पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जंगल में छापेमारी की।
जब एसडीपीओ सन्नी वर्धन पुलिस टीम के साथ तिलक को छुड़ाने पहुंचे, तो डर और अंधेरे के कारण तिलक ने पुलिस अधिकारियों को ही नक्सली समझ लिया। वह घबराकर पुलिस से दूर रहने की कोशिश करने लगा और मदद के लिए पुकारने लगा।
इसी बीच भागते हुए अपहरणकर्ता चिल्ला रहे थे—“जंगल में नक्सली आ गया।” अपराधियों की इस आवाज से तिलक का डर और बढ़ गया। बाद में पुलिस टीम ने उसे भरोसा दिलाया कि वे पुलिसकर्मी हैं और सुरक्षित बाहर निकालकर उसकी जान बचाई।
पुलिस अब गिरोह में शामिल अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
