
कान्हाचट्टी/चतरा । देश डिजिटल युग में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गांव-गांव तक इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाने के दावे किये जा रहे हैं, लेकिन कान्हाचट्टी प्रखंड की मदगड़ पंचायत का नायकीहेसाग गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क के लिए तरस रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड गठन के बाद से अब तक गांव में मोबाइल नेटवर्क की समुचित सुविधा नहीं पहुंची है। नेटवर्क की समस्या के कारण गांव के लोगों का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट सा गया है।
नायकीहेसाग के ग्रामीणों के लिए मोबाइल नेटवर्क आज भी सुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ी जरूरत और मजबूरी बन चुका है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में नेटवर्क नहीं रहने से बच्चों की पढ़ाई, रोजगार, सरकारी योजनाओं की जानकारी, ऑनलाइन कामकाज और सबसे गंभीर रूप से स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में भारी परेशानी होती है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
ग्रामीणों ने बताया कि आज स्कूलों में पढ़ाई से जुड़ी कई गतिविधियां ऑनलाइन संचालित होती हैं। बच्चों को ऑनलाइन क्लास, जरूरी शैक्षणिक सामग्री और अन्य सूचनाओं के लिए मोबाइल इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। लेकिन गांव में नेटवर्क नहीं होने के कारण बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाते।
ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे गांवों और शहरों के बच्चे मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं नायकीहेसाग के बच्चों को नेटवर्क के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है। इससे बच्चों का समय भी बर्बाद होता है और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है। बीमार पड़ने पर बढ़ जाती है परेशानी मोबाइल नेटवर्क नहीं होने का सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीणों को आपातकालीन परिस्थितियों में भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, यदि गांव में किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो जाए या किसी तरह की दुर्घटना हो जाए, तो तत्काल डॉक्टर, एंबुलेंस या परिजनों को फोन करना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि फोन करने के लिए करीब एक किलोमीटर दूर जाकर नेटवर्क तलाशना पड़ता है। गंभीर मरीज की स्थिति में यह दूरी और समय काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने अक्सर असहाय होने की स्थिति पैदा हो जाती है। शिकायतों के बाद भी समस्या जस की तस ग्रामीणों का आरोप है कि नेटवर्क की समस्या कोई नई नहीं है। इसे लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत की जा चुकी है। ग्रामीणों ने गांव में मोबाइल टावर लगाने अथवा नेटवर्क की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय गांव की समस्याओं को दूर करने का भरोसा दिया जाता है, लेकिन नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा के मामले में अब तक कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है। जिनके पास पैसा, वे खुद कर रहे इंटरनेट की व्यवस्था नेटवर्क की समस्या से परेशान गांव के कुछ आर्थिक रूप से सक्षम ग्रामीणों ने अपने स्तर पर इंटरनेट की वैकल्पिक व्यवस्था की है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोग बिजली के खंभों के सहारे वाई-फाई की व्यवस्था कर अपने जरूरी काम चला रहे हैं। लेकिन हर परिवार इस तरह की सुविधा का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आज भी मोबाइल नेटवर्क एक बड़ी समस्या बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव में सरकारी स्तर पर मोबाइल कनेक्टिविटी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है, तो लोगों को मजबूरी में अपने खर्च पर वैकल्पिक इंतजाम करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने की टावर लगाने की मांग,नायकीहेसाग के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित दूरसंचार कंपनियों से गांव में जल्द मोबाइल टावर स्थापित कर नेटवर्क की समस्या दूर करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल नेटवर्क अब विलासिता नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने की बुनियादी जरूरत है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से समस्या झेलने के बाद भी अगर गांव में नेटवर्क की सुविधा नहीं पहुंचती है, तो यह ग्रामीणों के साथ अन्याय है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर गांव में स्थायी मोबाइल नेटवर्क की व्यवस्था कराने की मांग की है।
कान्हाचट्टी संवादाता नितेश कुमार सिंह
