
कान्हाचट्टी/चतरा । प्रखंड मुख्यालय स्थित सीताराम सायल बगीचा में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस समारोह धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिकंदर सिंह खरवार ने की। समारोह में कान्हाचट्टी प्रखंड के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए। लोगों की भारी भीड़ से कार्यक्रम स्थल पर दिनभर उत्सवी माहौल बना रहा। समारोह में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपरा की मनमोहक झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में समुदाय के लोगों ने नृत्य, ढोल-नगाड़े और गीतों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। पारंपरिक गीतों की धुन और नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा, भाषा और सामाजिक मूल्यों से जुड़ी है। आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना बेहद जरूरी है। युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़कर रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों तथा उनकी संस्कृति, परंपरा और पहचान के संरक्षण को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस घोषित किया है। वर्ष 1995 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिवस मनाया गया था। समारोह में पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता, चतरा एसडीएम जहूर आलम, कान्हाचट्टी सीओ मनोज गोप, प्रखंड प्रमुख इंदु कुमारी, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह, नरेश खरवार, प्रभु मुंडा, सुभाष सिंह भोक्ता, संगीता नाथ, सरिता देवी, दशरथ सिंह भोक्ता सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। समारोह के दौरान आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और परंपरा को संरक्षित रखने का संदेश दिया गया। पारंपरिक नृत्य, गीत और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच कार्यक्रम देर शाम तक उत्साहपूर्ण माहौल में चलता रहा।
