
इटखोरी/चतरा: शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर की मूर्तियों के अचानक गायब होने से पूरे मोहल्ले में खलबली मच गई थी। माता‑पिता की तरह पीढ़ियों ने जिन 24 तीर्थंकरों को सालों से पूजा और सम्मान दिया, वे रातों‑रात लापता हो गईं — बात सिर्फ धातु की नहीं, यह उस विरासत और यादों की चोर थी जो परिवार और समाज ने संभाली थी। पर दुख बहुत लंबा टिक नहीं पाया। पुलिस की तीव्रता और स्थानीय लोगों की सतर्कता ने दो घंटे के भीतर ही उस दर्द को मुस्कान में बदल दिया।
इटखोरी थाना प्रभारी, पुलिस अवर निरीक्षक अभिषेक कुमार सिंह ने खास छापामारी कर गुप्त सूचना के आधार पर मयूरहंड निवासी संदीप सिंह को गिरफ्तार किया। आरोपी की निशानदेही पर पचास लाख रुपये से अधिक मूल्य की अष्टधातु से बनी 24 तीर्थंकर प्रतिमाएँ बरामद कर ली गईं और चोरी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त की गई। खबर सुनते ही मंदिर के अनेक श्रद्धालुओं की आँखों में राहत के आँसू छलक पड़े — जिन्हें लगा था कि उनकी पीढ़ियों की श्रद्धा नष्ट हो गई, अब वह फिर लौट आई है। एसपी अनिमेश नैथानी ने बताया कि शिकायत 20 मई को ताराचंद जैन ने दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी चेन स्मोकर और नशेड़ी था और गांजा के नशे में उसने यह पवित्र वस्तु चोरी की योजना बनाई थी। आरोपी मूर्तियों को बेचकर दिल्ली के करोलबाग ले जाने की तैयारी में था। एसपी ने कहा कि जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है और इस तरह के मामलों में गम्भीरता से कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों ने पुलिस की सूझबूझ की प्रशंसा की और कहा कि समुदाय‑पुलिस सहयोग से ही ऐसी संवेदनशील संपत्ति की रक्षा संभव हुई। मंदिर में प्रतिमाएँ लौटते ही छोटी‑बड़ी रस्में और शांति की प्रार्थनाएँ फिर शुरू हो गईं — एक पल में टूटे भरोसे को जोड़ने का लंबा काम शुरू हो गया है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें, ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
