
हजारीबाग, एक शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के दिन को हिंसा में बदलते देख शहर भर के परिवारों के चेहरों पर चिंता की लकीरें उभर आईं। मतवारी मैदान में पुतला दहन के दौरान छात्रों पर कथित तौर पर किए गए हमले ने न सिर्फ उनकी आवाज़ को दबाया, बल्कि वहां मौजूद माता‑पिता और स्थानीय लोगों के दिलों में भय और आक्रोश भी जगा दिया। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सांसद डॉ. रविंद्र राय ने भाजपा जिला कार्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि यह हमला सुनियोजित था और इसे जनता बेदखल होकर नहीं देखेगी। “लोकतंत्र से टकराने का यह दु:साहस हेमन्त सरकार न करे,” उन्होंने कहा और सरकार की कार्रवाईयों पर कड़ा रोशनी डाली।
क्या था मामला
कल आयोजित कार्यक्रम में छात्रों ने शांतिपूर्ण ढंग से पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ अपनी नाराज़गी जताई थी। उसी दौरान, डॉ. राय के मुताबिक, पुलिस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कुछ कार्यकर्ताओं के सहयोग से छात्रों पर हमला किया गया। यह घटना केवल हजारीबाग तक सीमित नहीं रही; रांची और गिरिडीह में भी समान किस्म की घटनाओं की जानकारी मिली है।
छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश
डॉ. राय ने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए एक योजना बनाई थी। उनका कहना था कि 25–30% नियुक्तियों में कथित बेईमानी को छुपाने के लिए पूरे रोजगार पर प्रहार एक सूझबूझ भरा षड्यंत्र था, जिससे अदालतों का हस्तक्षेप अनिवार्य हो और कुछ नेताओं के हित सुरक्षित रह सकें। “इसीलिए सीबीआई जांच जरूरी है,” उन्होंने ज़ोर देकर कहा।
लोकतंत्र के लिए खड़े हैं हम
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखते हुए छात्रों के साथ खड़ी है। “न्याय मांगने वालों को लाठियाँ मिलने वाली जगह नहीं है,” डॉ. राय ने कहा, और चेतावनी दी कि हेमन्त सरकार का यह रवैया राज्य में कभी स्वीकार्य नहीं होगा।
स्थानीय संदर्भ और तंज
डॉ. राय ने इतिहास का हवाला देते हुए झामुमो पर पुराने आरोप दोहराए — गुंडागर्दी, खेत-खलियान में लूट और चंदा वसूलने की प्रवृत्ति। उन्होंने कहा कि वर्तमान घटनाएँ उसी चरित्र की संकेत हैं। साथ ही कांग्रेस पर भी आरोप लगाए गए कि वह मौके का फायदा उठाकर झामुमो को समर्थन दे रही है और सत्ता का दुरुपयोग कर रही है।
स्थानिक चिंताएँ
मतवारी मैदान पर मौजूद लोगों के मुताबिक़, घटना के बाद सुरक्षा की स्थिति बिगड़ गई और कई परिवारों ने अपने बच्चों की परवाह जताई। स्थानीय व्यापारियों और स्कूलों में भी आज सुबह बेचैनी देखी गई—लोगों का भरोसा डगमगा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित है या नहीं।
आगे क्या होगा
डॉ. राय ने सरकार पर दबाव बनाते हुए मांग की है कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सीबीआई के माध्यम से हो। भाजपा का कहना है कि वह छात्रों के हक के लिए संघर्ष जारी रखेगी और लोकतांत्रिक विरोध के तरीकों का समर्थन करेगी।
