
चतरा शहर के बीचों-बीच रोजगार सेवक राजेश कुमार शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। जहाँ एक तरफ परिजन इसे सोची-समझी साजिश और हत्या करार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस की जांच एक अलग ही दिशा में इशारा कर रही है। क्या राजेश कुमार शर्मा किसी साजिश का शिकार हुए या फिर आधी रात की उस खामोशी में किसी पिकअप वैन ने उनकी जिंदगी छीन ली? आइए, विस्तार से समझते हैं इस उलझी हुई गुत्थी को। हंटरगंज प्रखंड के डाहा पंचायत में कार्यरत रोजगार सेवक राजेश कुमार शर्मा, जिन्हें लोग प्यार से ‘बउला’ कहते थे, रविवार शाम एक शादी समारोह में शामिल होने निकले थे। लेकिन किसे पता था कि यह उनकी आखिरी शाम होगी। देर रात शहर के पुराना पेट्रोल पंप स्थित फेमस मेडिकल के पास उनका शव मिला। राजेश के सिर के पीछे गहरे जख्म के निशान थे। परिजनों ने जब उन्हें सड़क किनारे लहूलुहान पाया, तो उम्मीद की आखिरी किरण के साथ अस्पताल ले गए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था—डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने मृतक के परिवार को झकझोर कर रख दिया है। मृतक के भाई रंजीत शर्मा ने कैमरे के सामने आकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। रंजीत का कहना है कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या की साजिश है। उनके मुताबिक, राजेश का मोबाइल फोन मौके से गायब होना और उसका स्विच ऑफ मिलना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि वारदात के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई है। परिजनों का सवाल है कि अगर यह हादसा था, तो मोबाइल कहाँ गया?परिजनों के दावों के उलट, चतरा सदर थाना प्रभारी अवधेश सिंह ने जांच के बाद एक अलग ही तथ्य पेश किया है। थाना प्रभारी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और प्रारंभिक जांच के आधार पर यह हत्या नहीं, बल्कि एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना प्रतीत हो रही है। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में एक अनियंत्रित पिकअप वैन राजेश को रौंदते हुए निकलती दिखाई दे रही है। पुलिस का मानना है कि इसी टक्कर की वजह से सिर में गंभीर चोट आई, जो मौत का कारण बनी। हालांकि, मोबाइल के गायब होने पर पुलिस अभी भी बारीकी से जांच कर रही है।राजद नेता नंदकिशोर ठाकुर और स्थानीय विधायक जनार्दन पासवान ने इस घटना पर दुख जताते हुए प्रशासन से निष्पक्षता की मांग की है। परिजनों ने प्रशासन के सामने एक करोड़ रुपये मुआवजा और आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी है। शहर के लोग और रोजगार सेवक संघ अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की अंतिम तफ्तीश क्या सच सामने लाती है। एक तरफ पुलिस का ‘हादसा’ वाला दावा है और दूसरी तरफ परिजनों की ‘हत्या’ की आशंका। सच क्या है, यह तो विस्तृत जांच के बाद ही साफ होगा। लेकिन इस घटना ने चतरा शहर की रात्रि सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
संवाददाता, प्रवीण कुमार सिंह
