
लावालौंग/चतरा : स्वास्थ्य विभाग के द्वारा विभिन्न कर्मियों और योजनाओं के लिए निर्गत किए जाने वाले राशि को लेकर बड़ी लापरवाही और अनदेखी का मामला सामने आया है।जानकारी के अनुसार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से संचालित योजना के तहत प्रसव के बाद पात्र महिलाओं को मिलने वाली 1400 रुपए की प्रोत्साहन राशि पिछले करीब तीन वर्षों से लावालौंग और सिमरिया स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाली कई लाभुक महिलाओं को नहीं मिलने का मामला सामने आया है।सोमवार को सिमरिया प्रभारी के निर्देश पर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर आधार कार्ड और बैंक पासबुक के साथ लावालौंग स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं।महिलाओं के पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं के लिए यह राशि काफी महत्वपूर्ण है। कई कामकाजी महिलाएं अपना काम छोड़कर दिनभर जरूरी दस्तावेज जमा कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर काटती रहीं।सदर मुखिया नेमन भारती ने मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही और अनदेखी के लिए जिम्मेवार कौन है।उन्होंने जिला के वरीय अधिकारियों से पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है।
ग्राम स्वास्थ्य समिति को भी तीन साल से नहीं मिली राशि-
ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने और आकस्मिक इलाज समेत अन्य आवश्यक कार्यों के लिए गठित ग्राम स्वास्थ्य समितियों को मिलने वाली करीब 10 हजार रुपए की राशि भी पिछले तीन वर्षों से नहीं मिलने की बात सामने आई है।ग्रामीणों ने राशि के उपयोग और भुगतान की प्रक्रिया की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि राशि का उचित उपयोग नहीं किया गया।
उपकेंद्रों के विकास और रखरखाव पर भी सवाल
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स्वास्थ्य उपकेंद्रों के विकास और रखरखाव के लिए भी हजारों रुपए की अच्छी खासी राशि आती थी।इस आने वाली राशि को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों से पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने के कारण कई स्वास्थ्य केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं और रखरखाव का अभाव है।इससे ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
सहिया से लेकर एंबुलेंस कर्मियों तक भुगतान लंबित
स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत कुरियर कर्मियों,एंबुलेंस चालकों व अन्य कर्मियों के अलावा स्वास्थ्य सहियाओं के मानदेय और प्रोत्साहन राशि के भुगतान में भी देरी की शिकायत है।कर्मियों के अनुसार किसी का भुगतान करीब छह माह से तो किसी का एक वर्ष से लंबित है।इससे उनके सामने आर्थिक परेशानी उत्पन्न हो रही है।
प्रभारी और लेखापाल पर भी उठे सवाल
विभागीय सूत्रों के हवाले से कर्मियों में यह चर्चा है कि सिमरिया रेफरल अस्पताल में चिकित्सा प्रभारी बीएन प्रसाद और लेखापाल मेहताब अंसारी के कार्यभार संभालने के बाद से भुगतान और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर समस्याएं बढ़ी हैं।कुछ कर्मियों ने दोनों को हटाने की मांग किए जाने की बात कही है। कर्मियों का कहना है कि वे कार्रवाई के डर से खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं।
विधायक बोले- दोषी मिले तो होगी कार्रवाई
सिमरिया विधायक कुमार उज्जवल दास ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है।वे जल्द ही पूरे मामले की जानकारी जुटाकर उपायुक्त से मिलकर बात करेंगे।यदि जांच में किसी भी संबंधित व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसे हटाने और सख्त कार्रवाई कराने की दिशा में पहल की जाएगी।
इधर प्रभारी बीएन प्रसाद से पूछे जाने पर वे कोई भी स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।और यह कहकर पल्ला झाड़ दिया कि उक्त विषयों की जानकारी लेखापाल के पास है उससे ही पूछ लीजिए।इसके बाद लेखापाल से पूछे जाने पर उन्होंने भी स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया और सिर्फ इतना ही कहा कि मैं सिर्फ सहियाओं से संबंधित कार्य को देखता हूं शेष कि जानकारी प्रभारी ही दे सकते हैं। इस प्रकार प्रभारी और लेखापाल एक दूसरे पर बात फेंकते हुए पल्ला झाड़कर निकल गए।
रिपोर्टर मो0 साजिद
