
चतरा के नगवां मोहल्ले में एक छोटा-सा घर इन दिनों बेचैन है। उसी घर के कमाने वाले, टेम्पो चालक तिलक यादव, पिछले चार दिन से लापता हैं। 13 सितंबर को वे टेम्पो लेकर राजपुर जाने की बात कहकर निकले थे, बस इतना ही याद है परिवार को। उसके बाद से न कोई फोन, न कोई खबर—बस इंतज़ार है, जो हर पल भारी पड़ रहा है। घर में पत्नी और छोटे-छोटे बच्चे हैं। तिलक के नहीं लौटने से पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है; बच्चे बार-बार पूछते हैं—”बाबू कब आएंगे?” मोहल्ले के लोग भी तलाश में जुटे हैं, क्योंकि तिलक सबके परिचित थे। परिजनों की सूचना पर सदर थाना पुलिस ने विशेष टीम बनाई है। शहर से सटे धमनिया इलाके से तिलक का टेम्पो लावारिस हालत में बरामद हुआ है। टेम्पो मिला, पर तिलक नहीं—यही बात परिवार को तोड़े जा रही है। पुलिस अब टेक्निकल टीम की मदद से मोबाइल और अन्य सुरागों की पड़ताल कर रही है। धैर्य का बांध टूटा तो परिजनों ने चतरा-हजारीबाग मुख्यपथ को न्यू कोर्ट मोड़-विकास भवन चौक के पास जाम कर दिया। आंदोलन में टेम्पो चालक संघ के सदस्य भी शामिल हुए। सड़क जाम से वाहनों की लंबी कतार लग गई, लेकिन लोगों का गुस्सा उस वक्त कम नहीं हुआ जब तक एसडीपीओ सन्नी वर्धन और एएसआई दुखीराम महतो मौके पर नहीं पहुंचे। टेम्पो चालक संघ के अध्यक्ष राजू दबगर ने कहा, “चार दिन बीत गए, पर कोई सुराग नहीं। परिवार के साथ हम सभी को अनहोनी की चिंता सता रही है।” उन्होंने एसपी और एसडीपीओ से तलाश और तेज करने की मांग की। एसडीपीओ ने लोगों को समझाया कि पुलिस हर संभावित पहलू पर काम कर रही है। “विशेष टीम झारखंड-बिहार के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर रही है। उम्मीद है, तिलक जल्द सुरक्षित मिलेंगे,” उन्होंने कहा और परिजनों व आम लोगों से पुलिस को सहयोग करने की अपील की।
