
कान्हाचट्टी/ चतरा। प्राकृतिक महापर्व करमा पूजा को लेकर प्रखंड क्षेत्र के ग्राम जसपुर में मंगलवार को खरवार समाज की युवतियों और बच्चियों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ जावा डलिया रखी। इस दौरान बच्चियों ने नदी से शुद्ध बालू लाकर बांस की टोकरी में भरा और उसमें विभिन्न प्रकार के अनाज के बीज बोकर जावा जगाने की परंपरा निभायी। जावा डलिया में धान, गेहूं, मकई, उड़द, जौ, मूंग, चना व कुर्थी समेत सात प्रकार के अनाज के बीज बोये गये। इसके बाद बच्चियों ने सामूहिक रूप से करम गीत गाकर जावा डलिया की स्थापना की। गांव में इस दौरान पारंपरिक उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। करमा पर्व से जुड़ी है जावा जगाने की परंपरा आदिवासी एवं जनजातीय समाज में करमा पर्व के अवसर पर जावा जगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि जावा डलिया में उगने वाले अंकुर प्रकृति की उर्वरता, समृद्धि और अच्छी फसल के प्रतीक हैं। करमा पूजा से पूर्व जावा डलिया रखकर बच्चियां इसकी नियमित देखभाल करती हैं।हल्दी पानी का छिड़काव कर करती हैं देखभाल,करमा पूजा के दिन तक बच्चियां सुबह-शाम जावा डलिया में हल्दी मिश्रित पानी का छिड़काव करती हैं। इस दौरान करम गीत गाते हुए डलिया के चारों ओर पारंपरिक नृत्य भी किया जाता है। लगातार देखभाल के बाद बालू से पीले रंग के अंकुर निकलते हैं, जिन्हें ‘जावा फूल’ कहा जाता है। भाइयों के दीर्घायु और समृद्धि की करती हैं कामना,करमा पूजा की रात करम की डाल की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद जावा फूल को आपस में तथा भाइयों को दिया जाता है। इस दौरान बहनें अपने भाइयों के दीर्घायु, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वहीं अच्छी बारिश, बेहतर फसल और परिवार की समृद्धि के लिए भी प्रार्थना की जाती है। जसपुर में जावा डलिया रखने की यह परंपरा न केवल करमा पर्व की धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि प्रकृति, कृषि और नई फसल के प्रति समाज के गहरे जुड़ाव का भी प्रतीक है। मौके पर समाजसेवी सह नेता सिकेंद्र सिंह खरवार समेत पूनम देवी, पाना देवी, रिंकू देवी, दुलारी देवी, धुर्वा देवी, उषा देवी, करुणा देवी, झालो देवी, किरण देवी सहित बड़ी संख्या में युवतियां और बच्चे मौजूद थे।
