
Chatra : लावालौंग प्रखंड क्षेत्र के कोलकोले पंचायत अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय चुकरू में प्रशासनिक अनदेखी और कुव्यवस्था के कारण शिक्षा व्यवस्था बदहाली के दौर से गुजर रही है। विद्यालय का भवन जहां एक ओर पूरी तरह जर्जर होकर हादसे को दावत दे रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ सीधा सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। विद्यालय के परिसर का हाल यह है कि जहां बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) तैयार किया जाता है, उसके ठीक चारों तरफ भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा, सड़े-गले प्लास्टिक, गोबर और पक्षियों की बीट फैली चीजें फैली हुई है। इस दूषित वातावरण और मक्खियों के बीच खुले में खाना बनाए जाने से भोजन में संक्रमण फैलने और बच्चों के गंभीर रूप से बीमार पड़ने की प्रबल आशंका बनी हुई है।
खुले आसमान के नीचे भोजन बनाने की मजबूरी
एमडीएम की रसोइया फूलमनी देवी ने बताया कि रसोई गैस का सिलेंडर काफी दिनों से खाली पड़ा हुआ है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा गैस रीफिल कराने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण विवश होकर उन्हें गंदगी से भरे खुले स्थान पर लकड़ी के चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ रहा है। खुले में तेज हवाओं और आसपास उड़ती धूल व गंदगी के बीच भोजन का सुरक्षित रहना नामुमकिन साबित हो रहा है।
उपस्थिति का ग्राफ गिरा, अभिभावकों में रोष
विद्यालय में पहली से आठवीं कक्षा तक कुल 150 बच्चों का नामांकन दर्ज है। हालांकि, बदहाल व्यवस्था, असुरक्षित भवन और भोजन की खराब गुणवत्ता के कारण रोजाना महज 40 से 45 बच्चे ही विद्यालय पहुंच पा रहे हैं। कई दिन तो यह आंकड़ा सिमटकर मात्र 20 से 25 बच्चों तक रह जाता है। ग्रामीणों व अभिभावकों का कहना है कि जान-माल के खतरे और अस्वास्थ्यकर माहौल को देखते हुए वे अपने बच्चों को विद्यालय भेजने से कतराने लगे हैं।
प्रशासनिक तालमेल का अभाव, आरोप-प्रत्यारोप तेज
मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन के बीच तनातनी का माहौल है। कोलकोले पंचायत के मुखिया राजेश कुमार साहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विद्यालय की दयनीय स्थिति और एमडीएम की अनियमितताओं को लेकर वे बीते एक माह से लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापक अपनी मनमानी करते हैं और जनहित व बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सुझावों को सिरे से नजरअंदाज कर देते हैं।
वहीं, दूसरी ओर विद्यालय के प्रधानाध्यापक गौतम प्रजापति ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका पदस्थापन हाल ही में, 3 अक्टूबर को हुआ है। वे विद्यालय की समस्याओं को समझने और व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधीक्षक एवं संबंधित उच्चाधिकारियों से विद्यालय की जांच कर अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही विद्यालय भवन की मरम्मत, नियमित गैस आपूर्ति और स्वच्छ वातावरण में भोजन पकाने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी घट सकती है।
रिपोर्टर मो0 साजिद
