
Chatra : सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव की मौत ने एक बार फिर कोयला ढुलाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस सड़क पर रोजाना सैकड़ों हाईवा दौड़ते हैं और लगातार हो रहे हादसों में बेगुनाह लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस सुधार नहीं किया जा रहा। दरअसल जम्मू-कश्मीर में तैनात जवान लक्ष्मण कुमार यादव तीन दिन पहले ही छुट्टी पर अपने घर लौटे थे। गुरुवार को देल्हो घाटी में कोयला खाली कर लौट रहे एक हाईवा ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और करीब 20 घंटे से आक्रोशित लोगों ने मुआवजे और इस सड़क से कोयला ढुलाई बंद करने को लेकर सड़क जाम किये हुए हैं। उनका कहना है कि यह कोई पहला हादसा नहीं है। इस सड़क पर पहले भी कई लोग कोयला वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। उनका आरोप है कि कोयला ढुलाई से जुड़े भारी वाहनों की तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और अनियंत्रित आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से यह सड़क लोगों के लिए खतरनाक बन गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोयला परिवहन से सरकार और कंपनियों को राजस्व मिलता है, तो सड़क सुरक्षा, स्पीड कंट्रोल और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे। उनका कहना है कि हादसों के बाद केवल मुआवजे की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा, दोषियों पर कार्रवाई और इस सड़क से हजारीबाग का कोयला चतरा की सड़कों पर ढुलाई नहीं होने देने की से चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जबतक इस पर सहमति नहीं बनेगी तक आंदोलन जारी रहेगा।
