
Chatra : झारखण्डी एकता की ओर जन यात्रा” चतरा में झारखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित की गई, जिसमें जनता ने अपने जन-प्रतिनिधियों से विकास, भूमि सुधार, कानून व्यवस्था और स्थानीय संसाधनों के दोहन को लेकर कड़े सवाल उठाए। जनता का कहना था कि विकास का लाभ बाहरी कंपनियों को हो रहा है, जबकि स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी नगण्य है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठाने पर लाठीचार्ज और झूठे मुकदमों का आरोप भी सामने आया है। लगभग 80% लोगों के पास जमीन का सरकारी कागज नहीं है, और भूमि सुधार कानून लागू नहीं हुआ है, जिससे जमीन के झूठे मुकदमों और जेल जाने की शिकायतें आम हैं। कानून व्यवस्था पर भी ग्रामीणों ने पुलिस और थाने को ग्रामसभा दबाने वाला बताया और संघर्षशीलों पर झूठे मुकदमे लगाने का आरोप लगाया गया है।जनता ने मांग की है कि वनभूमि का पट्टा तुरंत जारी किया जाए, जाति प्रमाण पत्र व आवास प्रमाण पत्र की प्रक्रिया सरल हो, और जमीन के मामलों में जांच के बाद FIR दर्ज हो। स्कूल शिक्षा की नियमित मॉनिटरिंग, DMFT फंड का उचित उपयोग, पोस्टा उन्मूलन के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्य समिति गठन, आंगनबाड़ी, मनरेगा, PDS की कड़ी जांच, तथा बाजार और सोलर चापाकल की जिम्मेदारी तय की जाए। जनता ने कहा कि वे गरीब जरूर हैं, लेकिन बेवकूफ नहीं, और अब 25 साल में जो विकास नहीं हो सका उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।यह जन यात्रा न केवल सवाल उठाने वाली थी, बल्कि लोगों में एक नई उम्मीद भी जगाई। इस दौरान स्थानीय लोग विकास की कमी, भूमि अधिकारों की अनिश्चितता, और कानून व्यवस्था की स्थिति पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। झारखंड की पहचान ग्रामसभा की समानता और सामूहिक संस्कृति से जुड़ी है, लेकिन आरोप हैं कि जाति, पार्टी और धर्मों में बंटाव बढ़ रहा है, जो एकता के लिए खतरा है। यह यात्रा राज्य के राज्य स्थापना के 25 वर्षों के अवसर पर एक चेतना जागरूकता की पहल के रूप में दिखाई गई
