कुन्दा प्रखंड क्षेत्र के बौधाड़ीह पंचायत अंतर्गत हारूल (चितवातरी) गांव में पांच अनाथ बच्चे खुले आसमान में रहने को विवश है। सबसे बड़ी विडंवना है की पांचों भाई नाबालिक है। ज्ञात हो कि लगभग एक वर्ष पूर्व इनकी माता मनिया देवी का निधन हो गया था वही माता के निधन के 3 वर्ष पूर्व इनके पिता बल्ली गंझु की मौत हो चुकी है। सबसे बड़ा भाई सरोज कुमार बताता है की किसी तरह से मेहनत मजदूरी कर अपने व अपने भाइयों के लिए भोजन का प्रबंध करता हु। ऐसे हालात में घर बनाना हमारे बस से बाहर की बात है हलाकी फिर भी सरोज अपने चारों भाइयों को छत देने के लिए जद्दोजहद कर मिट्टी का दीवाल खड़ा कर रहा है। यदि इन अनाथ बच्चों को किसी भी तरह का सरकारी स्तर पर आवास देने का प्रबंध किया जाता तो शायद इन्हें भी छत के नीचे सुकून का नींद मिल पाता। वही यदी इन्हें सामाजिक स्तर पर कोई फरिश्ते का भी सहारा मिल जाता तो इनके जीवन के दुःख से थोड़ी सहूलियत मिल जाती। लेकिन फिलहाल यह पांचों अनाथ भाई खुले आसमान में सोने को विवश है। वही संबंधित पंचायत क्षेत्र के पंचायत सेवक राजु रंजन का कहना है की अनाथ बच्चों के पिता का नाम प्रधानमंत्री आवास एसीसी डाटा में है परंतु सरकारी नियमानुसार 18 वर्ष के बाद ही किसी सदस्य के नाम से प्रधानमंत्री आवास का स्वीकृति दिया जा सकता है। जबकी अनाथ भाई में सबसे बड़ा भाई सरोज का उम्र भी 18 वर्ष से कम है।
कुन्दा,रंजीत शौंडिक

