
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड के अंबाटांड गांव के बीटेक पास उदय कुमार ने पुणे की मल्टीनेशनल कंपनी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी। यूट्यूब से ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, इंटरक्रॉपिंग और हाइब्रिड बीज जैसे उन्नत तरीके सीखे। चार सालों में अपनी 5 एकड़ के साथ 15 एकड़ लीज पर लेकर मिर्च, टमाटर, मटर, पत्ता गोभी और अरहर की खेती शुरू की,पहली फसल में तकनीकी कमी से एक लाख का नुकसान झेला, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्रों से ट्रेनिंग और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की 90% सब्सिडी से उबर आए। पिछले 12 महीनों में 21 टन मिर्च बेचकर 10 लाख से ज्यादा का कारोबार किया, जहां कीमतें 40 से 80 रुपये किलो तक रहीं। अब एकड़ से 9-10 लाख शुद्ध मुनाफा हो रहा है, बतादें कि उदय के माता-पिता भीम साव और मीरा देवी अब खेतों में हाथ बंटाते हैं, जहां पहले दो जून की रोटी मुश्किल थी। जिला कृषि पदाधिकारी गौतम कुमार ने सरकारी योजनाओं के सही उपयोग की तारीफ की। आसपास के युवा उनकी देखादेखी सब्जी खेती अपना रहे हैं, चतरा को खेती का हब बनाने का सपना देखते उदय कहते हैं—जुनून हो तो डिग्री किसी भी क्षेत्र में चमक सकती
