
Chatra : स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के 99वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित झारखंड राज्य प्रान्तीय आर्य महासम्मेलन के दूसरे दिन वैदिक कर्मकांड, महिला सशक्तिकरण तथा राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित सत्र हुए।
प्रथम सत्र: 51 कुण्डीय विश्वकल्याण महायज्ञ
प्रातःकाल पारिवारिक, सामाजिक सुख-समृद्धि हेतु 51 कुण्डीय विश्वकल्याण महायज्ञ संपन्न हुआ। झारखंड के विभिन्न जिलों से आए धर्मप्रेमी सज्जनों तथा सैकड़ों यजमान परिवारों ने आहुतियाँ देकर इसे सफल बनाया।मुख्य यजमान संजय प्रसाद आर्य ने नेतृत्व किया। यज्ञ के ब्रह्मा वैदिक विद्वान् आचार्य कृष्णप्रसाद कौटिल्य (आर्ष गुरुकुल हजारीबाग निर्देशक) रहे। आर्ष गुरुकुल हजारीबाग की ब्रह्मचारिणियों ने वेद मन्त्रों का पाठ किया तथा यज्ञोपरांत ईश्वर भक्ति व यज्ञ महिमा पर मधुर भजन गाकर सभी को भावविभोर कर दिया।सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश जी के आगमन पर डीएवी पब्लिक स्कूल चतरा के छात्रों ने मनमोहन स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
द्वितीय सत्र: महिला सम्मेलन
अध्यक्षता डॉ. सरस्वती चतुर्वेदी (उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त प्राध्यापिका, वर्तमान में हजारीबाग कन्या गुरुकुल से जुड़ी) ने की। मुख्य वक्ता स्वामी आर्यवैष जी ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर प्रकाश डाला—स्वामी दयानंद के संपर्क में आस्तिक से निडर सन्यासी बने, स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद अमृतसर कांग्रेस अधिवेशन सफल बनाया, शुद्धि आंदोलन चलाया, मलकाना राजपूतों की जबरन धर्मांतरण रोककर घर वापसी कराई तथा जामा मस्जिद के मीनार पर वेद मन्त्रों का उच्चारण करने वाले प्रथम व्यक्ति बने।महिलाओं के संदर्भ में कहा—’माता निर्माता भवति’। आज की बेटियाँ विश्व स्तर पर छाप छोड़ रही हैं, यह स्वामी दयानंद की देन है। आर्य समाज ने भ्रूण हत्या, सती प्रथा, विधवा पुनर्विवाह के विरुद्ध आंदोलन चलाए, टंकारा से अमृतसर तक जनचेतना यात्राएँ निकालीं तथा भ्रूण हत्या रोकने हेतु कानून दिलवाया।वैदिक विदुषी मैत्रेयी आर्या ने कहा—नारी ब्रह्मा है, समाज का सृजन नारी करती है, जिसका स्थान सर्वोच्च है। आचार्य अरुण जी ने नारी शक्ति पर विचार व्यक्त कर चतरा गुरुकुल के लिए शैक्षणिक सहयोग का संकल्प लिया।आर्ष कन्या गुरुकुल हजारीबाग की छात्राओं ने वीरांगना लक्ष्मीबाई पर सुंदर नाटक प्रस्तुत किया। श्रीमती रश्मिप्रकाश जी (चतरा समाजसेवी), सुषमा आर्या, नेहा साहू, सीता देवी, कमला देवी, रूपा देवी, अनीता देवी, सुनीता देवी, ललिता देवी, सौभाग्यवती आर्या, शारदा आर्या की गरिमामय उपस्थिति रही।
तृतीय सत्र: राष्ट्रीय एकता पर कवि सम्मेलन
अध्यक्षता वरुण बिहारी (झारखंड राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा उपप्रधान, रांची समाजसेवी) ने की। मुख्य कवि डॉ. सारस्वत मोहन मनीषी (दिल्ली) ने युवाओं को प्रेरित करने वाली, देशप्रेम जागृत करने वाली उत्कृष्ट कविताएँ सुनाईं।कोलकाता से आचार्य योगेश शास्त्री ने ओजस्वी वाणी से देशभक्ति, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक दायित्व निभाने को प्रेरित किया। सहयोग में पूर्णचंद्र आर्य (रांची), जीवन गोप जी (हजारीबाग), संयोजक गिरधारी प्रसाद आर्य, अमरजीत राम, पवन साहू, विजय आर्य, सुनील कुमार, विद्यासागर आर्य, सत्यदेव आर्य आदि उपस्थित रहे।
