
चतरा: रुढ़िवादी संयुक्त ग्रामसभा मंच के तत्वावधान में मंगलवार को टंडवा अंचल कार्यलय के समक्ष आदिवासी समाज ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में आक्रोश रैयतों ने सीसीएल प्रबंधन व अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। घूसखोरी बंद करो, रैयतों का जमीन लूटना बंद करो, फर्जीवाड़ा बंद करो सीसीएल प्रबंधन बाहरी को नौकरी देना बंद करो के नारे जमकर लगाया गया। रैयतों ने कहा पिपरवार सीसीएल द्वारा रैयतों की जमीन का म्यूटेशन करा कर लूटना चाहती हैं। आरोप लगाया गया कि सीसीएल ने भूमि अधिग्रहण के लिए 2013 में बने कानून की जगह सीबी एक्ट 1957 के तहत नोटिफिकेशन किया। सीसीएल ने रैयतों की जमीन 25-30 वर्षों के लिए लीज पर लिया था। अब जहां खनन कार्य खत्म हो चुका है, सीसीएल जमीन को समतल और उपजाऊ बना कर रैयतों को सौंपे। सीसीएल प्रबंधन और अंचल के कर्मी अधिकारी के मिली भगत से फर्जीवाड़ा कर के पूर्व में पिपरवार में दर्जनों बाहरी लोगों को नौकरी दिया देने का आरोप लगाया है। कहा सीसीएल प्रबंधन मनमानी करके आदिवासियों रैयतों को हक अधिकार से वंचित रखकर मनमाना तरीका से कोयला ट्रांसपोर्टिंग कर रही है। इन सभी मुद्दों पर स्वतंत्र जांच एजेंसी जांच करने के मांग की गई है। राज्य सरकार भी रैयतों की जमीन का रसीद काटना शुरू करे। इसके अलावा विस्थापितों की नौकरी, मुआवजा व पुनर्वास पर भी चर्चा की गयी। विस्थापित प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, एक एकड़ जमीन के बदले नौकरी देने, पुनर्वास के लिए 25 डीसमिल जमीन उपलब्ध कराने, नौकरी देने में विलंब नहीं करने आदि मांगे की गयी। अंत मे आदिवासियों ने टंडवा बीडीओ सह सीओ देवलाल उरांव को 25 सूत्री मांग पत्र सौंपा।
