
चतरा मे बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा गवाह बनी, जहां कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंद्रदेव गोप और एडवोकेट आभा ओझा के खून उबालते नेतृत्व में पोस्ट ऑफिस परिसर गूंज उठा क्रांतिकारी नारों से। मनरेगा—गरीबों की धड़कन, गांधीजी की अमर विरासत—उसके नाम पर क्रूर कुठार चलाने वाले केंद्र के इस पाप के खिलाफ एक दिवसीय उपवास व धरना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया!यह नाम परिवर्तन नहीं, हत्यारा वार है! करोड़ों भूखे पेटों को रोटी थमाने वाली यह योजना, जो मजदूरों को गुलामी की जंजीरों से आजाद करती है, उसे राजनीतिक भेड़ियों के पंजों तले कुचला जारहा है,क्या यह गांधीजी के बलिदान का अपमान नहीं, ग्रामीण भारत की रग-रग में दौड़ने वाली यह जीवनरेखा टूटेगी तो खून की नदियां बहेंगी!चंद्रदेव गोप गरज उठे: “यह साजिश गरीबों को गुलाम बनाने की है—हम चुप नहीं बैठेंगे, आंदोलन की ज्वाला सुलगाएंगे!” आभा ओझा की करुण पुकार: “मां-बहनों के पसीने की कमाई पर यह जुल्म, संवेदनहीन सरकार, अब बस बहुत हुआ—कांग्रेस लड़ेगी अंतिम सांस तक!” धरना स्थल पर क्रोध की लहरें और पूरे चतरा में विद्रोह का आगाज हुआ है!
