
चतरा, कान्हाचट्टी। रात के ग्यारह बज चुके हैं। राजपुर बाजार में सन्नाटा पसरा है, तभी अचानक एक विशालकाय जंगली हाथी की दहाड़ से पूरा इलाका थर्रा उठता है। शुक्रवार रात करीब दस बजे यह भयानक दृश्य देखकर ग्रामीण दहशत में चीखने लगे। बच्चे रोते हुए माँओं की गोद में समा गए, दुकानदार सामान समेटकर भागे। मौत का साया मंडरा गया था!लेकिन हमारे साहसी ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। दिल में डर था, पर एकजुटता ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने फावड़े-कुदाल उठाए, जगह-जगह आग के गोले जलाए, पटाखों की बौछार की, देसी बम फोड़े और टायरों से धुंआधार शोर मचाया। आँसू भरी आँखों से वे चिल्ला रहे थे, “भगाओ इसे, हमारे बच्चों को बचाओ!” घंटों की जद्दोजहद के बाद हाथी धीरे-धीरे जंगल की ओर लौट गया।ईश्वर की कृपा हुई कि कोई जानी-माल की हानि नहीं हुई। फिर भी, उन पलों की यादें आज भी ग्रामीणों के दिल को कँपाती हैं। “रात को नींद ही नहीं आ रही,” बताते हैं एक बुजुर्ग। वन विभाग को सूचना दे दी गई है, लेकिन ग्रामीण चीख-चीखकर मांग रहे हैं- “हमें स्थायी सुरक्षा दो, वरना ये आखिरी रात न बन जाए!” उन्होंने सबको अपील की- रात में अकेले न निकलें, समूह में रहें।प्रत्यक्षदर्शी कहते हैं, गांव और आसपास के इलाकों में अब हर कोई सतर्क है। जंगलों की कमी और चारे की तलाश में भटकते ये हाथी मानव जीवन को दाँव पर लगा रहे हैं। अब समय है प्रशासन जागे, सोलर फेंसिंग लगाए और जागरूकता फैलाए- ताकि ऐसी रातें दोबारा न आएं।
संवाददाता: नितेश कुमार सिंह
