
Chatra : होली का वो दिन था, जब पूरा शहर रंगों और ठंडाई में डूबा हुआ था। लेकिन शहर के दीभा मोहल्ले की प्रीति देवी के लिए ये त्योहार दर्द का सैलाब बन गया। पांच महीने की गर्भवती थीं प्रीति, जब दुर्घटना में उनके पति बबलू राम की दुनिया छोड़कर चले गए। अकेली पड़ गईं वो, बिना किसी सहारे के। कोई भाई नहीं, कोई दोस्त नहीं—सिर्फ़ एक अनजाने बच्चे का बोझ और प्रसव की तीव्र पीड़ा।घर से टेंपो पकड़कर सदर अस्पताल पहुंचीं प्रीति। डॉक्टरों ने हालत देखी तो सिर पकड़ लिया—क्रिटिकल केस, सर्जरी ज़रूरी, लेकिन सर्जन उपलब्ध नहीं। रेफर कर दिया मेडिकल कॉलेज हजारीबाग। तभी खबर पहुंची आरबी हॉस्पिटल के संचालक जीएस राजू तक। वो फौरन एंबुलेंस लेकर दौड़े। बिना एक पल गंवाए प्रीति को अपने हॉस्पिटल ले आए। उनकी टीम ने महज एक घंटे में निशुल्क सर्जरी कर दी। जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित! सर्जरी के बाद दवाइयां, पौष्टिक भोजन—सब कुछ फ्री।प्रीति की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार खुशी के। उन्होंने कहा, “कोई मदद को नहीं आया, लेकिन राजू सर फरिश्ता बन आए।” राजू जी बोले, “ये हमारा फर्ज़ है। प्रीति पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी, तब तक सारा खर्च हम उठाएंगे। बाद में जीविका का इंतज़ाम भी करेंगे।” आरबी हॉस्पिटल ऐसी मिसालें रोज़ पेश करता है—आत्मसंतोष के लिए, इंसानियत के लिए।कभी-कभी एक छोटा-सा कदम पूरी ज़िंदगी बदल देता है। प्रीति की मुस्कान ही इस होली का सबसे सुंदर रंग है।
