
Chatra लोक आस्था के महापर्व ‘चैती छठ’ का आज सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समापन हो गया। चतरा जिले के ऐतिहासिक कठौतिया तालाब के तट पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। चार दिनों के कठिन निर्जला उपवास के बाद व्रतधारियों ने पारंपरिक गीतों के बीच छठी मैया और भगवान भास्कर की आराधना की। भोर की पहली किरण के साथ ही कठौतिया तालाब का नजारा भक्तिमय हो गया। फल-फूल और प्रसाद से सजे सूप लेकर व्रती पानी में उतरे और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि चैती छठ का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व न केवल आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है, बल्कि कठिन गर्मी के मौसम में प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी है। कठौतिया तालाब पर मौजूद लोगों ने परंपराओं पर चर्चा करते हुए कहा कि चैती छठ, कार्तिक छठ की तरह ही फलदायी है और इसमें शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद घाट पर ही प्रसाद वितरण हुआ और व्रतधारियों ने पारण कर अपना उपवास तोड़ा। जिला प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा सुरक्षा व सफाई के पुख्ता इंतजाम देखे गए, जिससे श्रद्धालुओं में काफी उत्साह रहा।
संवाददाता,प्रवीण कुमार सिंह
