
चतरा : लावालौंग प्रखंड के हेडुम पंचायत सचिवालय में सुशासन सप्ताह के तहत आयोजित प्रशासन गांव की ओर कार्यक्रम महज औपचारिकता बनकर रह गया। कार्यक्रम में निर्धारित ब्लॉक स्तरीय कर्मी नहीं पहुंचे, जिससे ग्रामीणों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, लेकिन हेडुम पंचायत में इसका असर शून्य नजर आया।ग्रामीणों के अनुसार कार्यक्रम की पूर्व सूचना दी गई थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं और आवेदन लेकर पंचायत सचिवालय पहुंचे थे। लेकिन प्रतिदिन के तरह सिर्फ पंचायत कर्मी ही मौजूद थे।लोगों को उम्मीद थी कि जमीन, पेंशन, आवास, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित समस्याओं का मौके पर ही समाधान होगा। लेकिन ब्लॉक कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण न तो आवेदन लिए गए और न ही किसी समस्या का निस्तारण किया गया।
पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि कार्यक्रम के नाम पर सिर्फ उपस्थिति दर्ज कर औपचारिकता पूरी की गई। न तो संबंधित विभागों के अधिकारी पहुंचे और न ही कोई शिविर जैसा माहौल रहा। इससे ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया। कई ग्रामीणों ने कहा कि वे रोजी-रोटी छोड़कर कार्यक्रम में आए थे, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ा।ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम अगर सही तरीके से आयोजित हों तो लोगों को प्रखंड कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रिपोर्टर मो0 साजिद
