
Chatra : हंटरगंज के रामनारायण मेमोरियल महाविद्यालय एवं इंटरनेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट बेंगलुरू कर्नाटका के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन महाविधालय के सेमिनार हॉल आयोजित की गई।
इस ऐतिहासिक सेमिनार का उद्घाटन संस्थापक सचिव कमल कुमार केशरी एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय के वित्त सलाहकार डा० सुनील कुमार सिंह,डीएस डब्लू डा० मिथलेश कुमार सिंह,रुसा कोऑर्डिनेटर डा० चंद्रशेखर सिंह,सचिव डा० प्रमोद कुमार,प्राचार्य प्रो जैनेंद्र कुमार सिंह,आईसी एसआरडी डायरेक्टर एन कुमार तथा पूर्व विधायक जनार्दन पासवान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस सेमिनार का टॉपिक “अकादमिक अनुसंधान गतिविधियों के विकास के लिए एक पद्धतिगत दृष्टिकोण” पर अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि संसार की जब से उत्पति हुई मनुष्यों के द्वारा शोध जारी है।उसी शोध और तपस्या का देन है कि आध्यात्मिक युग से भौतिक युग में प्रवेश कर गए हैं।शोध निरंतर जारी है और आगे जारी रखने पर बल दिया गया।भारत ऋषि मुनियों और संत फकीरों का देश रहा है।शोध कर्ताओं ने शोध के बदौलत ही हम तक अक्षर का ज्ञान पहुंचने में सफल रहे।उसी अक्षर ज्ञान से ही संसार में संवाद कर पाना संभव हुआ है।शोध कर्ताओं ने अपने पूरे जीवन को लगा कर बहुत सारी चीज हम तक पहुंचाए।विश्व पटल पर हमारा शोध का ग्राफ बहुत ही चिंता जनक है।पूरी दुनिया के शोध के समक्ष हमारा शोध तीन फीसदी ही है।भले आज भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन विश्व गुरु का स्थान प्राप्त करने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में अभी भी शोध करने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने आगे कहा कि नव युवकों को शोध के क्षेत्र में कदम आगे बढ़ाना चाहिए ताकि राष्ट्र निर्माण और उत्थान में सहयोगी बने।उक्त टॉपिक इस दौर के लिए जहां प्रासंगिक है वहीं आने वाले समय में भी काफी सूद मंद साबित होगा।इतना ही नहीं धार्मिक गरंथो पर भी व्यापक शोध की जरूरत है।आध्यात्मिक और भौतिक शोध भी समय का पुकार है।इतना ही नहीं जीवन शैली और अपने क्रिया कलाप पर भी शोध करना चाहिए।इस युग के युवा वर्ग शोध के क्षेत्र में संव्य स्थापति करें तभी देश उन्नति के राह पर चल पाएगा।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो जैनेंद्र कुमार सिंह जबकि संचालन एनएसएस पीओ डा फहीम अहमद और रुसा कोऑर्डिनेटर प्रो फखरुद्दीन अंसारी संयुक्त रूप से कर रहे थे।आईसीएसआरडी बंगलुरु कर्नाटका की अनमोल तबस्सुम,डॉली दत्ता,सरिता कुमारी ने महती भूमिका निभाई।इस सेमिनार में अंकुश कुमार,सीमा कुमारी, डा रामजीत यादव और प्रो सरयू यादव ने शोध विषय पर विचार व्यक्त किया।इस कार्यक्रम की शुरआत विश्विद्यालय के कुल गीत से शुरू किया गया और राष्ट्रीय गान पर समापन किया गया।इस कार्यक्रम में महाविधालय के कर्मी एवं छात्र छात्रा शामिल हुए।
