
रांची । उर्दू दिवस के अवसर पर झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ की विशेष बैठक रविवार को रांची में आयोजित की गई। इस अवसर पर महान शायर, दार्शनिक और चिंतक डॉक्टर अल्लामा मोहम्मद इकबाल को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संघ के सदस्यों ने इकबाल के साहित्यिक योगदान और उनकी वैचारिक भूमिका को याद करते हुए उन्हें संदेशवाहक कवि बताया।संघ के महासचिव अमीन अहमद ने कहा कि अल्लामा इकबाल ने अपनी रचनाओं के माध्यम से युवाओं में आत्मविश्वास और कर्मशीलता की भावना जगाई। उनकी नज़्में आज भी मेहनत, ईमान और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देती हैं।एसए-1 परीक्षा में उर्दू प्रश्नपत्र की मांगसंघ ने पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए आगामी एसए-1 परीक्षा में उर्दू विषय का प्रश्नपत्र उर्दू भाषा में तैयार करने की मांग रखी। संघ का कहना है कि विद्यार्थियों को मातृभाषा में परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए।अवकाश सूची को लेकर असंतोषसंघ ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि आश्वासन के बावजूद उर्दू विद्यालयों के लिए अलग वार्षिक अवकाश सूची अब तक जारी नहीं हुई है। जेसीईआरटी से वर्ष 2026 के लिए सामान्य और उर्दू विद्यालयों की अलग-अलग अवकाश तालिका जारी करने की अपील की गई।आलिम और फाजिल डिग्री पर आपत्तिसंघ ने जैक द्वारा मदरसा बोर्ड के तहत आलिम व फाजिल की डिग्री जारी करने के निर्णय को गलत बताया। संघ का कहना है कि यह कार्य रांची विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र है। राज्य सरकार से मांग की गई कि विशेष कैबिनेट बैठक बुलाकर रांची विश्वविद्यालय को इसका अधिकार सौंपा जाए।नेतृत्व और उपस्थितिबैठक की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष अब्दुल माजिद खान ने की, जबकि संचालन केंद्रीय महासचिव अमीन अहमद ने किया। बैठक में संगठन के कई सदस्य उपस्थित थे, जिनमें अब्दुल गफ्फार अंसारी, गुलाम अहमद, शाहिद अनवर, साबिर अहमद, एनामुल हक़, शहज़ाद अनवर, मोहम्मद फखरुद्दीन, महफूजूर रहमान, मोहम्मद फिरोज, सरवर आलम, मोहम्मद दिलदार, साज़िद खान और अफज़ल मल्लिक प्रमुख रूप से शामिल थे।कार्यक्रम का समापन उर्दू भाषा के उत्थान, शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के संकल्प के साथ हुआ।
