
चतरा शहर के अंसार नगर वार्ड नंबर 15 में रविवार को अंसारी फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रवादी नेता और स्वतंत्रता संग्राम के सशक्त योद्धा स्वर्गीय अब्दुल कयूम अंसारी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में हाजी मोहम्मद नईम अंसारी, मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद शाह फैसल, हाजी मोहम्मद साबिर अंसारी, मोहम्मद शाहिद, कयूम अंसारी, हकीम अंसारी, इब्राहिम अंसारी समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभा में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि कयूम अंसारी जैसी शख्सियतें समय के बीतने के बाद भी दिलों में जीवित रहती हैं। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर के नेताओं को यदि राष्ट्रवाद और सामाजिक प्रतिबद्धता का पाठ पढ़ना हो, तो उन्हें अब्दुल कयूम अंसारी के जीवन को पढ़ना चाहिए। वे उन चुनिंदा नेताओं में थे, जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ संघर्ष और भारत की अखंडता के खिलाफ मुस्लिम लीग की राजनीति, दोनों से एक साथ लड़ाई लड़ी। वे स्पष्टवादिता के इतने धनी थे कि उन्हें किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति कभी रास नहीं आई।कयूम अंसारी का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था। बचपन से वे सामाजिक असमानता और आर्थिक विषमता को नजदीक से समझते थे। यही भावना आगे चलकर उनके संघर्ष का मूल बनी। वे असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन के सक्रिय सिपाही रहे। जेल गए, प्रताड़नाएं झेलीं, लेकिन आंदोलन से कभी पीछे नहीं हटे।उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे धर्म और जाति के नाम पर जनता को बांटने की राजनीति के हमेशा खिलाफ रहे। उन्होंने खुले मंच से यह कहा कि “भारत मुसलमानों का भी उतना ही है जितना हिंदुओं का”— और इस सोच ने उन्हें राष्ट्रवादी राजनीति का असली चेहरा बनाया। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने वंचित वर्गों, विशेषकर पिछड़ी जातियों और मोमिन समुदाय के अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। मोमिन सम्मेलन को उन्होंने नई दिशा देकर सामाजिक न्याय की राजनीति को वास्तविक अर्थों में जमीन दी। उनकी आवाज इतनी निर्भीक थी कि दिल्ली की सत्ता भी उनके तर्कों को नजरअंदाज नहीं कर पाती थी।
केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए भी उनकी सादगी मिसाल थी—न कोई दिखावा, न राजनीतिक तिकड़म, सिर्फ काम और समाज के प्रति जवाबदेही।श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज राजनीति में भीड़ है लेकिन कयूम अंसारी जैसे “चरित्रवान नेता” विरले हैं। उनके जीवन का संघर्ष आज की युवा पीढ़ी को बताता है कि देश सेवा केवल मंचों से नहीं, बल्कि निरंतर त्याग और ईमानदार निष्ठा से होती है।कार्यक्रम के अंत में अंसारी फाउंडेशन ने उनके आदर्शों पर चलने और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया। सभा में यह भाव भी बार-बार उभरकर आया कि यदि आज राजनीति में कयूम अंसारी जैसे कुछ नेता होते, तो देश की सामाजिक परिस्थितियाँ कहीं अधिक सौहार्दपूर्ण और संतुलित होतीं।
