विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना की कोऑर्डिनेटर डा० जॉनी रूफीना तिर्की रविवार को
राम नारायण मेमोरियल कॉलेज हंटरगंज के एनएसएस इकाई के द्वारा लगाए जा रहे सात दिवसीय विशेष शिविर के चौथे दिन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुई। इनके आगमन पर कॉलेज के सेमिनार हॉल में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो जैनेंद्र कुमार सिंह ने किया जबकि संचालन एनएसएस पीओ डा० फहीम अहमद कर रहे थे। मुख्य अतिथि डा० जॉनी रूफिना तिर्की ने अपने संबोधन में एनएसएस के द्वारा ग्राम डुमरी कलां में किए जा रहे सामाजिक जागरूकता कार्यों की सराहना करते हुए कही की सामाजिक कार्यों से जहां अंतर आत्मा को शांति मिलती है वहीं सामाजिक स्तर पर पिछड़े लोगों से मिलकर जानने का अवसर मिलता है।उन्होंने आगे कहा कि हजारों स्टूडेंट्स कॉलेज में एडमिशन लेते हैं लेकिन सभों को यह अवसर नही मिलता जो आप सभों को मिल रहा है। एनएसएस विलेंटियर अपना तुलना दूसरे स्टूडेंट्स से कर के देखें की किस के व्यक्तित्व का विकास हुआ है।एनएसएस का मुख्य उद्देश सामाजिक सेवा के साथ व्यक्त्तिव का निर्माण करना है।एनएसएस से जुड़े लोगों की जीवन शैली में दिखना चाहिए।उन्होंने आगे कहा की एनएसएस का लक्ष्य गीत भारत के संविधान की प्रस्तावना की तरह सब कुछ बताता है की किया करना है सिर्फ उस गीत में डूब कर देखा जाए जीवन सार्थक हो जायेगा।इस इकाई के द्वारा बेहतर कार्य करने वाले वॉलिंटियर विश्वविद्यालय,राज्य और राष्ट्र स्तर के प्रतियोगिता में जा सकते हैं जहां आपके व्यक्तित्व का विकास ही नहीं बल्कि एक अनोखा निर्माण होगा।जीवन का मूल मंत्र होना चाहिए की आप का जीवन यूंही और लोगों के तरह व्यर्थ तो नही हो रही है। ।जीवन में अगर इसे अपना लिया गया तो जीवन सफल और सार्थक होगी।जीवन जीने के उद्देश्यों की प्राप्ति हो सकती है।मुख्य अतिथि के आगमन पर एनएसएस के वोलेंटियरो ने पुष्प वर्षा करते हुए सेमिनार हॉल तक लाया।जहां उन्हें फूलों का माला पहना कर स्वागत किया गया।कार्यक्रम का आगाज रोहणी रानी और उममे शानिया के लक्ष्य गीत और क्लैपिंग से विधिवत किया गया।इस मौके पर स्वागत गीत प्रीति कुमारी और संजू कुमारी ने संयुक्त रूप से गाई।दहेज जागरूकता पर ऋषभ राज गुप्ता ने इस समाज में अभिशाप बताया। जबकि मुस्कान कुमारी ने दहेज पर कविता के माध्यम से इस कुरीतियों को दूर करने का आह्वान किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सरदार दिलजीत सिंह,सौरभ कुमार,मो जावेद,नितेश कुमार,मनीष कुमार,मो फैजान खालिद, साद अहमद,स्नेह लता ,अनामिका कौर,संजू कुमारी के अतिरिक्त सभी स्वयंसेवकों में महती भूमिका निभाई।


