पाम संडे यानी खजूर रविवार को ईसाई धर्म के अनुयायियों के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। वर्ष 2023 में दिन रविवार, 2 अप्रैल को पाम संडे मनाया जा रहा है। पाम संडे को पवित्र सप्ताह की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है। इसका समापन ईस्टर के रूप में होता है। पाम संडे दक्षिण भारत में प्रमुखता से मनाया जाता है। इसे ‘पैसन संडे’ भी कहा जाता है। यह दिन ईसाई समुदाय के लोगों में प्रभु यीशु के यरुशलम में विजयी प्रवेश के रूप में मनाया जाता हैं। ईसाई समुदाय में ईस्टर से पहले 40 दिनों तक रोजे रखे जाते हैं। पाम संडे को ‘पैसन संडे’ भी कहा जाता है। यह दिन ईसाई समुदाय के लोगों में प्रभु यीशु के यरुशलम में विजयी प्रवेश के रूप में मनाया जाता हैं। पवित्र बाइबल में पाम संडे के बारे में जो उल्लेख मिलता है, उसके मुताबिक, प्रभु यीशु जब यरुशलम पहुंचे, तो उनके स्वागत में बड़ी संख्या में लोग अपने हाथों में पाम यानी खजूर की डालियां लहराते हुए एकत्रित हो गए थे। लोगों ने प्रभु यीशु उनका जोरदार स्वागत किया था और उनके दिए गए उपदेशों को अंगीकार करने का संकल्प लिया था। इसी खास दिन की याद में पाम संडे (Palm Sunday) मनाया जाता है।
पवित्र बाइबल में पाम संडे के बारे में कहा गया है कि, प्रभु यीशू जब यरुशलम पहुंचे थे तब उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग खजूर की डालियां हाथों में लहराते हुए स्वागत के लिए खड़े थे। इसलिए इस दिन की याद में हर साल पाम संडे या खजूर रविवार मनाया जाता है और यीशू को सलीब पर चढ़ाए जाने से पहले उनका स्वागत किया जाता है। पाम संडे के खास अवसर पर देश दुनिया के चर्चों में विशेष आयोजन होते हैं। इसमें बाइबल का पाठ, प्रवचन और मिस्सा का भी आयोजन होता है। पाम संडे यानी खजूर रविवार, पवित्र गुरुवार और गुड फ्राइडे को प्रभु यीशु के आखिरी रात्रिभोज के रूप में जाना जाता है। पाम संडे के साथ ईसाई समुदाय का पवित्र सप्ताह शुरू होता है। इसी हफ्ते के शुक्रवार को गुड फ्राइडे और फिर रविवार को ईस्टर मनाया जाता है। पाम संडे के दिन ईसाई धर्म के अनुयायी प्रभु यीशु के आगमन की खुशी में गीत गाकर स्वागत करते हैं। लोग खजूर की डालियों को लेकर चर्च जाते हैं। ईसाई समुदाय में दिनों झांकियां सजा कर प्रभु यीशु का जीवन दर्शाया जाता है। चर्च से मिलने वाले खजूर के पत्ते यीशु की तस्वीर के सामने रखे जाते हैं। पाम संडे से चर्च में शुरू होने वाली विशेष आराधना में ईसाई अनुयायी प्रभु यीशु की भक्ति में लीन रहते हैं। इस अवसर पर लोगों के बीच खजूर भी बांटे जाते हैं।


