Chatra : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चतरा द्वारा विश्व मलेरिया दिवस पर बुधवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मलेरिया विभाग के डॉक्टर गुलाम सरवर के द्वारा बताया गया कि मादा एनोफ़्लिज मच्छर के काटने से मलेरिया बीमारी होती है। भारत में दो प्रकार के मलेरिया रोग होते है। जिसमे पहला प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम और दूसरा प्लाज्मोडियम वाइवेक्स है। दोनों खतरनाक होते हैं। यह मच्छर सूर्यास्त के बाद काटते है। इसकी रोकथाम एवं उसके बचाव के लिए अपने आसपास पानी को जमा न होने दें। जमे हुए पानी में कीटनाशक, जला हुआ मोबिल, किरासन तेल डालें। जिससे मच्छर प्रजनन न कर सके। पानी की टंकी को ढक कर रखें। फ्रिज, कूलर, फूलदानी व अन्य बर्तनों का पानी सप्ताह में एक दिन अवश्य सुखा लें। घरों के अंदर कीटनाशक का छिड़काव करें एवं मच्छरदानी का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। भारत में मलेरिया का संक्रमण 65% प्लाजमोडियम वाइवैक्स तथा 35 प्रतिशत प्लाजमोडियम फैल्सीपैरम के कारण होता है। छोटे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं में मलेरिया ज्यादा होती है। इसके कारण माता मृत्यु, मृत शिशुओं का जन्म, नवजात शिशुओं का वजन अत्यधिक कम होना एक प्रमुख समस्या है। इसे रोकने के लिए गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व मलेरिया की जांच अनिवार्य की गई है।
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